ऐ ज़ाइरे कूये नबी इतना तो कर ऐ मेहरबां
अहल-ए-मदीना को सुना हाल-ए-नईम-ए-ख़स्ता जां
मायूसीयों की कसरतें नाकामीयों पर हसरतें
तन्हाईयों की वहशतें अंदोह-ए-ग़म की दास्तां
बे-ताबीयों का सिलसिला बे-चीनीयों का मश्ग़ला
ना-सबीरीयों का ग़ुलग़ुला और शिद्दत-ए-दर्द-ए-निहां
सर में है सौदा-ए-जुनूं वहशत से हालत है ज़बूं
दिल से हुआ रुख़सत सुकून आंखों से अश्क-ए-ख़ूं रवां
शिद्दत पे है दौरान-ए-सर ज़ोरों पे है दर्द-ए-जिगर
ख़ूं रो रही है चश्म-ए-तर फट कर हुआ है दिल गुतां
जाते रहे ताब-ओ-तुवां आज़ा में कुव्वत है कहां
ग़म ने किया है नीम जां दर्द-ए-जुदाई अल-अमां
ये शोरिश-ए-तूफ़ान-ए-ग़म ये सोज़-ए-रंज-ओ-अलम
हिजरां के ये जौर-ओ-सितम और ये ज़ईफ़-ओ-ना-तुवां
दिन हसरतों में काटना रातों को रोना जागना
हर वक़्त ग़म का सामना हर लमहे आंखें ख़ून-फ़िशां
आ'दा के नर्ग़े हैं जुदा अपने हुए हैं बे-वफ़ा
हर सम्त से आई बला आफ़त का टूटा आसमां
जौर-ओ-सितम की बारिशें और दुश्मनों की साज़िशें
बे-कार हैं सब नालिशें मुस्लिम का ख़ूं है राएगां
हम क्या कहें हाल-ए-तबाह हम से हुए बे-हद गुनाह
बे-शक हैं हम सियाह नादिम हैं अब हम बे-गुमां
रब्बि ज़लमना नफ़सना तुबना इलैका रब्बना
फ़ग़फिरलना मा क़द मज़ह बख़्श ऐ रहीम-ए-बे-कसां
या अह्ल-ए-तैबत-अन्ज़ुरू अहवालना सुम्मज़हबू
इन्दश्शफ़ी-इ-वशफ़-उ फ़ी हज़रतिही बिल-जनान
कूह्लु लहू ख़ैर-अल-वरा इर्हम अला मन क़द असा
जा-अ इलैका ताइबन कुन दरगुज़र अज़ जुर्म-ए-आं
ऐ ख़तम-ए-पैग़ंबरां ऐ सरवर-ए-हर दो जहां
ऐ मालिक-ए-कौन-ओ-मकां रहमे ब-हाल-ए-आसियां
ऐ रहमत-ए-आलम मदद ऐ सय्यद-ए-अकरम मदद
ऐ दफ़-ए-हर ग़म मदद इमदाद ऐ शाह-ए-जहां
फ़रियाद ऐ सुल्तान-ए-दीं ऐ रहमत-लिल-आलमीन
तुम हो शफ़ी-उल-मुज़निबीन इस दर से हम जाएं कहां
फ़रियाद ऐ महबूब-ए-रब फ़रियाद ऐ शाह-ए-अरब
हम तुम से करते हैं तलब दिल की मुरादें हर ज़मां
दिल की मुरादें दीजिए मसरूर हम को कीजिए
अब तो ख़बर ले लीजिए ग़म हो चुके हैं बे-गरां
हम को ख़लासी हो अता हो दूर सब रंज-ओ-बला
आफ़त की घट जाए घटा चमकें न ग़म की बिजलियां
अब कीजिए ऐसा करम हो दीन का ऊंचा अलम
कुफ़्फ़ार की गर्दन हो ख़म इन का मिटे नाम-ओ-निशां
इस्लाम की लीजिए ख़बर और कुफ़्र को पहुंचे ज़रर
कुफ़्फ़ार हों ज़ेर-ओ-ज़बर सब भूल जाएं मस्तियां
मुस्लिम को फिर शौकत मिले इस्लाम को कुव्वत मिले
बद-ख़्वाह को ज़िल्लत मिले ऐ दीन-ए-हक़ के पासबां
ज़ौक़-ए-इबादत हम को दो, शौक़-ए-रियाज़त हम को दो
सुन्नत की रग़बत हम को दो, हम से अदा हों नेकियाँ
मुस्लिम हों बाहम मुत्तहिद, भाई का भाई हो मुमद
मिट जाए सब आपस की ज़िद, रश्क-ए-हसद से हो अमां
तैयबा में अपने लुत्फ़ से, इज़्न-ए-इक़ामत दीजिए
फ़ुर्क़त से दिल बेताब है, कब तक रहूँ हिंदोस्तां
राह-ए-मदीना दूर है, बंदा बहुत रंजूर है
और हाज़िरी मंज़ूर है, इमदाद सुलतान-ए-जहाँ
या रब्बना सल्ली अला महबूबिका महबूबना
अज़्का सलातिन दाइमन अन्मा सलातिन कुल्ल-ए-आन
या रब्बना सल्लिम अला रूहिन नबिय्यिल मुस्तफ़ा
वल आलि वस्-सहबी इला मा दारा दौरा नुज़ ज़मान